बड़ी अजीब स्थिति है गाजियाबाद की। यहां एक स्कूल ऐसा भी है जो ना तो जनप्रतिनिधियों की सुन रह है और ना प्रशासन की। ऐसा भी कह सकते हैं कि यह स्कूल जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन पर भारी पड़ रहा है। जिस स्कूल का मैं जिक्र कर रहा हूं उसका नाम डीडीपीएस है जो संजय नगर में है। आजकल संजय नगर का डीडीपीएस स्कूल अभिभावकों की धरने की वजह से सुर्खियों में है। दरअसल इस स्कूल ने छात्रों को प्रवेश तो दिया संजय नगर शाखा में और फिर शिफ्ट कर दिया मधुबन बापूधाम वाली शाखा में। अभिभावक इतनी दूर अपने बच्चों को भेजने के पक्ष में नहीं है। स्कूल ने मनमानी की तो अभिभावक धरने पर बैठ गए। अभिभावकों के धरने को कई नेताओं और संस्थाओं ने समर्थन भी दिया। सिटी मजिस्ट्रेट भी धरने पर पहुंचे जांच के लिए कमेटी बनाने की घोषणा की। क्षेत्रीय विधायक भी धरना स्थल पर पहुंचे। छात्र संगठन के पदाधिकारी भी वहां गए। हैरान करने वाली बात यह है कि सब कह रहे हैं कि स्कूल गलत कर रहा है मगर कोई भी स्कूल को मनमानी करने से रोक नहीं पा रहा है। स्कूल वाले ना किसी जनप्रतिनिधि की सुन रह हैं ना प्रशासन की। एक स्कूल की गलत बात के आगे प्रशासन पंगु नजर आने लगा है। प्रशासन की इतनी लाचारी शायद ही कभी दिखी होगी। कल अभिभावकों ने कहा था कि गाजियाबाद नेता विहीन हो गया है। इस बात में थोड़ा भी झूठ नहीं है। क्योंकि यदि गाजियाबाद में कोई नेता होता तो एक स्कूल की इतनी ताकत नहीं होती। एक स्कूल अभिभावको को धमकाने के लिए गेट पर बांउसर बिठाने की जुर्रत नहीं करता। सवाल यह भी है आखिर इस स्कूल के प्रबंधकों में इतनी ताकत आ कहां से रही है? प्रशासन इस स्कूल के सामने नतमस्तक क्यों है? अब तक स्कूल के खिलाफ मासूम छात्रों और अभिभावकों के उत्पीडऩ को लेकर केस दर्ज क्यों नहीं किया गया? गाजियाबादके नेताओं में तो जमीर नाम की कोई चीज बची ही नहीं है, यहां की जनता भी आत्मबल खो चुकी है। अब तक तो सभी अभिभावकों को डीडीपीएस संजय नगर से अपने बच्चे निकाल लेने चाहिए थे।