प्रमुख संवाददाता
गाजियाबाद (युग कवरट)। प्रदेश सरकार की ओर से वार्ड आरक्षण की सूची जारी कर दी गई है। दूसरी ओर वार्ड आरक्षण को लेकर कई रिट हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। इनमें कई रिट पर हाईकोर्ट में सुनवाई 19 दिसंबर को होने जा रही है। ऐसे में सवाल है कि क्या नगर निगम चुनाव पर इसका कोई असर होगा। इसके लिए युग करवट ने कई एक्सपर्ट से बात की है। इस मामले में तमाम एक्सपर्ट लगभग एक ही राय रखते हैं। उनका कहना है कि प्रदेश के अलग अलग एरिया से आरक्षण को लेकर जो आपत्तियां की गई हैं उनमें से कई रिट हाईकोर्ट में दायर की गई है। इनमें अधिकतर पर कहा गया है कि वार्ड का आरक्षण रेपिड सर्वे 2017 के आधार पर किया गया है, जबकि रेपिड सर्वे नए सिरे से कराकर वार्ड आरक्षण की व्यवस्था कराने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने रिट को स्वीकार कर लिया है और इसपर 19 को सुनवाई है। एक्सपट्र्स का कहना है कि अगर हाईकोर्ट को लगता है कि आरक्षण को लेकर सुनवाई पहले पूरी होनी है तो वह चुनाव की प्रक्रिया पर रोक लगा सकता था, मगर हाईकोर्ट ने ऐसा नहीं किया है। इसका एक कारण यह हो सकता है कि हाईकोर्ट चाहता है कि चुनाव की प्रदेश भर में चल रही प्रक्रिया को अभी नहीं रोका जाए। उसे शायद ऐसा नहीं लगा कि चुनाव की प्रक्रिया को स्टे कर दिया जाए। ऐसे में कुछ एक्सपर्ट यह भी मानते है कि चुनावी आचार संहिता के लागू होने के बाद भी सुनवाई चलती रहेगी।