उत्तर प्रदेश में एक लोकसभा और दो विधानसभा सीटों पर उप-चुनाव होने जा रहे हैं जिनके परिणाम पांच दिसंबर को आएंगे। हालांकि इन चुनावों से किसी भी सरकार पर कोई असर पडऩे वाला नहीं है, लेकिन यह चुनाव सियासत में एक नई इबारत जरूर लिख सकता है और यह इबारत अपने आप में बहुत अहम होगी। दो नेताओं की विरासत पर भी यह परिणाम क्या असर करेगा ये भी बड़ा सवाल है। मैनपुरी की लोकसभा सीट पर क्या फिर इस बार यादव परिवार का कब्जा बरकरार रहेगा और रामपुर विधानसभा सीट पर क्या फिर आजम खां का जलवा कायम रहेगा, यह चुनाव इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए मैं नई इबारत की बात कर रहा हूं। मैनपुरी की सीट नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव के स्वर्गवास होने के कारण खाली हुई और रामपुर की विधानसभा सीट आजम खां की विधायकी जाने के कारण रिक्त हुई है। मैनपुरी सीट पर यादव परिवार की ओर से मुलायम सिंह की बहू उम्मीदवार हैं, जबकि रामपुर विधानसभा सीट से पहली बार आजम खां या उनका कोई परिवार का सदस्य मैदान में नहीं है। आजम खां ने अपने करीबी आसिम राजा को दोबारा मैदान में उतारा है। लोकसभा चुनाव में वह पहले अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। भाजपा ने भी २०२२ में आजम खां से हारे आकाश सक्सेना को मैदान में फिर उतारा है। जाहिर है भाजपा ने एक बार फिर उन पर भरोसा किया है। अब क्या ये चले हुए मोहरे कोई नई इबारत लिखेंगे, ये बड़ा सवाल है। मैनपुरी में पुराने सपाई रघुराज शाक्य को डिंपल के सामने उतारा है। यह वही शाक्य हैं जो एक जमाने तक साईकिल पर सवार रहे हैं और इनके गुरु शिवपाल यादव हैं। फिलहाल शाक्य भाजपा में चले गए थे। शाक्य का वह अंदाज जो वह नामांकन करने जा रहे थे उससे पहले वह मुलायम सिंह की समाधि पर गए और उसको नमन किया, बाकायदा चूमा और फिर नामांकन पर गए। अब इसे राजनीतिक कहें या फिर आज भी क्या उनके अंदर सपा का वही राजनीतिक डीएनए है, इसको समझना मुश्किल है। वहीं, खतौली में भी भाजपा के विधायक विक्रम सैनी की भडक़ाऊ भाषण के मामले में विधायकी चली गई और यहां भी उप-चुनाव हो रहे हैं। रालोद ने यहां सपा के समर्थन के साथ पूर्व विधायक मदन भैया को उतारा है। जबकि, भाजपा ने विक्रम सैनी की पत्नी को ही टिकट दिया है। यहां का चुनाव भी अपने आप में काफी अहम है। हालांकि इस सीट के जीतने या हारने से सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन इन तीनों सीटों के परिणाम २०२४ की तस्वीर जरूर तय करेगा। क्या आकाश सक्सेना रामपुर में ८५ प्रतिशत मुसलमानों वाली विधानसभा में कमल खिला पायेंगे। यदि ऐसा हुआ तो फिर आने वाली तस्वीर बहुत बदल जाएगी। खतौली विधानसभा में जाट-मुस्लिम और गुर्जर एक साथ आकर अगर मदन भैया को जिताते हैं तो ये भी अपने आप में एक बड़ा संदेश होगा। मैनपुरी में यादव परिवार मोनोपॉली कायम रहेगी या फिर यहां भी कोई बदलाव होगा ये भी अपने आप में एक नई इबारत होगी। इसलिए इन तीनों सीटों के उपचुनाव क्या नई इबारत लिख पायेंगे इसका पता परिणाम से ही पता चलेगा। यदि रिवाज बदलता है तो फिर सियासत की तस्वीर बहुत बदल जाएगी।
– जय हिन्द।