उत्तराखंड विधानसभा में आज यूसीसी (समान नागरिक संहिता) बिल पेश किया गया। हालांकि थोड़ा बहुत हंगामा हुआ लेकिन उसके बाद सदन को स्थगित कर दिया गया। लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता बिल को कानूनी राय के बाद पेश किया गया। इस बिल को लेकर पहले बहुत चर्चाएं होती रहीं। हालांकि सदन में विपक्ष ने इसका खुलकर विरोध नहीं किया। विपक्ष का कहना था कि चर्चा होना जरूरी है। यूसीसी बिल पास होने के बाद इसकी पूरी उम्मीद है क्योंकि सदन पूरा बहुमत भाजपा का है इसलिए ये पास होगा और फिर इसका नोटिफिकेशन जारी होगा। उसके बाद उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन जायेगा जो यूसीसी लागू करेगा। दरअसल अगर इसके मसौदे पर गौर किया जाये तो इसमें बहुत कुछ महिलाओं के लिए फायदा भी है और कई ऐसे बदलाव भी है जो आम लोगों से संबंधित हैं उसमें किसी धर्म का कोई मामला नहीं है लेकिन फिर भी जो बदलाव हैं उसके लागू होने के बाद एक तरह से शरियत के जो कानून हैं जैसे मुस्लिम चार शादियां कर सकता है, ये कानून लागू होने के बाद उस पर पाबंदी लग जायेगी। संपत्ति बंटवारे में भी महिलाओं को बराबर का हक दिया गया है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशन में रहने वालों को भी सार्वजनिक जानकारी देना होगी। साथ ही शादी की उम्र भी तय कर दी गई है। शरियत में भी इस तरह की चीजें थी लेकिन चार शादियों को लेकर और सम्पत्ति बंटवारे को लेकर जो नियम थे वो भी अब यूसीसी के अमल में आने के बाद पूरी तरह बदल जाएंगे। अगर देखा जाए तो भाजपा ने बहुत ही सावधानी के साथ इस काम को किया है। अभी उत्तराखंड से शुरूआत हुई है और उसके बाद जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं वहां यूसीसी बिल जरूर लागू किया जायेगा ऐसी संभावना है। इस बिल के लागू होने के बाद मुस्लिम समाज की ओर से या अन्य समाज की ओर से क्या प्रक्रिया आयेगी उस पर भी अन्य सरकारें अपना कदम उठाएंगी ऐसा लगता है। लेकिन उत्तराखंड में पहल करके जरूर एक लंबी लकीर खींच दी है और जिस तरह से बदलाव किये गये हैं यदि विपक्ष उसका विरोध करता है तो उसका खामियाजा भी विपक्ष ही भुगतेगा क्योंकि बदलाव ऐसे हैं जिससे आम नागरिकों को जरूर राहत मिलेगी। जय हिंद