एकाएक गाजियाबाद के कई समाचार पत्रों में एक ही तरह की छपी खबर ने लोगों को हैरानी में डाल दिया। खबर का मजमून यह था कि गाजियाबाद में विधायक, एमएलसी, राज्यसभा सांसद आदि ने लोकसभा सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दरअसल हुआ यूं कि पांच नवंबर को कलेक्ट्रेट में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक हुई थी। बैठक में जिले के सभी जनप्रतिनिधि आमंत्रित थे। बैठक प्रशासनिक थी और जिले के विकास संबंधी कार्यों पर चर्चा होनी थी तो जनप्रतिनिधि तो बुलाए ही जाने थे। बैठक में केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह पहुंचे। लेकिन ना तो राज्यसभा सांसद बैठक गए और ना कोई विधायक। हां मोदीनगर विधायक मंजू शिवाच, जिला पंचायत अध्यक्ष ममता त्यागी, खोड़ा चेयरमेन रीना भाटी और नरेन्द्र कश्यप के प्रतिनिधि सौरभ जयसवाल भी बैठक में शामिल हुए। उसी दिन साहिबाबाद में एक भंडारा था उसमें राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल, विधायक अतुल गर्ग, सुनील शर्मा, अजितपाल त्यागी प्रसाद बांट रहे थे। मतलब इन जनप्रतिनिधियों ने जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में भाग लेने के बजाए भंडारे में जाना ज्यादा जरूरी समझा। इसी बात को लेकर समाचार पत्रों ने खबर बनाई कि दूसरे तमाम जनप्रतिनिधियों ने वीके सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसी विधायक ने कहा कि उन्हें वीके सिंह ने बुलाया नहीं था, जबकि बैठक प्रशासनिक थी, बुलाने की जिम्मेदारी प्रशासन की थी। किसी ने कहा कि उनके घर जनता की भीड़ थी, जो लगभग रोज ही रहती होगी। किसी को समय नहीं मिला वगैरा वगैरा बाते कहीं गई जो खुद में बहाने ज्यादा लग रही हैं। यह पूरा मामला गाजियाबाद में खुद को सत्ता का केन्द्र साबित करने और आने वाले नगर निगम चुनाव से जुड़ा है। यह वीके सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलना नहीं है बल्कि प्रेशर पोलिटिक्स है। सभी जानते हैं कि हमारे जनप्रतिनिधि अपने अपने निकटतम लोगों के लिए भापा से पार्षद का टिकट चाहेंगे। अब अगर किसी भी वार्ड पर वीके सिंह अड जाते हैं तो जिसे वह चाहेंगे वही टिकट पा जाएगा। वीके सिंह की बात नीचे से ऊपर तक कोई काट नहीं सकता यह भी सभी जानते हैं। तो विधायको, राज्यसभा सांसद, एमएलसी आदि ने वीके सिंह पर दबाव बनाने का काम शुरू कर दिया है। इनकी तैयारी यह है कि अभी से इतना प्रेशर बना लो कि कोर कमेटी में वीके सिंह किसी के लिए कुछ कहें ही ना। वीके सिंह यह संदेश देने के लिए मजबूर हो जाएं कि कहीं कोई विरोध नहीं है। ऐसे में अन्य जनप्रतिनिधियों का काम आसानी से निकल जाएगा, मनमर्जी तरीके से पार्षदों के टिकटों की बंदरबांट कर ली जाएगी। तो मेरा गाजियाबाद की जनता से कहना है कि दिखावे पर नहीं जाएं अपनी अक्ल लगाएं और इसे मोर्चा खोलना नहीं बल्कि प्रेशर पोलिटिक्स करना समझें।