युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। शहर को स्वच्छ रखने के लिए आए दिन जिला प्रशासन, नगर निगम सहित अन्य विभागों व संस्थाओं द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। हर कार्यक्रम के दौरान आमजन से अधिकारी अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने की अपील करते हैं, लेकिन लोगों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले ही कूड़े के ढेर पर बैठे हैं। हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय, विकास भवन की, जहां बैठे अधिकारी लोगों को जागरूक करते रहते हैं, लेकिन इन्हें खुद के आसपास जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर दिखाई नहीं देते।
जिला मुख्यालय और विकास भवन में जिले के मुखिया से लेकर अन्य विभागों के कई दर्जन कार्यालय हैं, जहां विभागीय अधिकारी से लेकर सैंकड़ो कर्मचारी कार्यरत हैं। लेकिन बात जब यहां की सफाई व्यवस्था की आती है तो सफाई कर्मचारी कार्यालयों का कचरा साफ कर उसे परिसर के आसपास ही जमा कर देते हैं। इतना ही नहीं दिन भर कर्मचारी इधर-उधर कूड़ा फेंकते रहते हैं जिससे जगह-जगह परिसर में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
यहां की सीढिय़ों के नीचे भी अच्छा खासा कचरा जमा रहता है, जहां गंदगी के कारण निकलना तक मुश्किल हो जाता है। हाल ही में सिटी मजिस्ट्रेट गंभीर सिंह ने जिला मुख्यालय में सफाई अभियान चलाया था, लेकिन इस अभियान का भी कोई असर दिखाई नहीं दिया क्योंकि जगह-जगह से कचरा तो साफ करा दिया गया, लेकिन कूड़े के ढेर नहीं हटाए गए। दिन भर सूखे पत्ते पेड़ों से गिर कर इधर-उधर फैलते रहते हैं।
विकास भवन के सामने पार्क से लेकर किनारों पर तक हर वक्त कूड़ा पड़ा रहता है, यहां तक कि खराब हो चुके वाहन तक भी वहां खड$क ह।
इतना ही नहीं बरसात के दिनों में इन वाहनों में पानी भर जाता है, जिससे मच्छरजनित बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। परिसर बैक साइड में कार्यालयों के शौचालय का पाइप नालियों में खुलता है, जिससे हर वक्त गंदा पानी परिसर में जमा रहता है। जिला मुख्यालय परिसर की खाली पड़ी जगह जो चैनल से कवर हैं, लेकिन वहां भी आते-जाते लोग कूड़ा जमा करते रहते हैं।
इसके अलावा जन सूचना केन्द्र के पास लगा हैंडपम्प खराब हो गया तो, वहां भी गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब खुद का घर साफ नहीं, तो फिर दूसरों को नसीहत कैसी?