नोएडा (युग करवट)। नोएडा के सेक्टर-93 स्थित एमराल्ड कोर्ट ट्विंस टावर को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को कड़ा फैसला सुनाया गया है। इस पर देर शाम नोएडा प्राधिकरण की ओर से विस्तृत जानकारी दी गई है। नोएडा प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि अदालत का प्रमाणित आदेश मिलने के बाद तुरंत अमल शुरू हो जाएगा। जिम्मेदार अधिकारियों पर एक्शन किया जाएगा। एमराल्ड कोर्ट में बनाए गए ट्विंस टावर का ध्वस्तीकरण किया जाएगा।
नोएडा प्राधिकरण की ओर से जारी किए गए विस्तृत बयान में कहा गया है कि यह प्रकरण करीब 10 वर्ष पुराना है। उच्चतम न्यायालय ने सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के दो टावर टी-16 और टी-17 को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। आदेश की प्रमाणित प्रति मिलते ही इसे लागू किया जाएगा। नोएडा प्राधिकरण ने आगे कहा है कि सेक्टर-93ए में भूखंड संख्या जीएच-4 का आवंटन ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए सुपरटेक लिमिटेड को वर्ष 2004 में किया गया था। इसके बाद वर्ष 2012 तक इस भूखंड से जुड़े नक्शे पास किए गए। प्लॉट का कुल क्षेत्रफल 54,815 वर्ग मीटर है। वर्ष 2005, 2006, 2009 और 2012 में समय-समय पर प्रोजेक्ट से जुड़े नक्शे पास किए गए है।
नोएडा प्राधिकरण ने आगे बताया कि इस प्रोजेक्ट की आरडब्ल्यूए ने सुपरटेक बिल्डर पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए 10 दिसंबर 2012 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक रिट पिटिशन फाइल की। जिसके दो मुख्य बिंदु रहे। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि बिल्डर ने नेशनल बिल्डिंग कोड-2005 और नोएडा भवन में विनियमावली-2010 में दिए गए प्रावधानों का पालन नहीं किया है। हाउसिंग सोसाइटी में बनाए गए टावर नंबर टी-1 और टी-17 के बीच न्यूनतम दूरी नहीं छोड़ी गई है। अतिरिक्त एफएआर का उपयोग करने और नए टावर का निर्माण करने के लिए सोसाइटी के निवासियों से सहमति नहीं ली गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरडब्ल्यूए की याचिका पर नोएडा प्राधिकरण, सरकार, बिल्डर और इस परियोजना में फ्लैट खरीदने वालों के पक्ष सुने। अंतत: 11 अप्रैल 2014 को हाईकोर्ट ने टावर नंबर टी-16 और टी-17 को ध्वस्त करने का फैसला सुनाया। साथ ही बिल्डर और प्राधिकरण के तत्कालीन अफसरों को दोषी करार दिया। प्राधिकरण को आदेश दिया कि इन सभी लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाए।