नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। कांवड़ यात्रा अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। हजारों की संख्या में शिवभक्त कांवडिय़ां जस्सीपुरा मोड़ स्थित दूधेश्वरनाथ मंदिर में लगातार जलाभिषेक कर रहे हैं। जिन कांवडिय़ों ने हाजिरी का जल अर्पण कर दिया है वे मंदिर के आसपास बने आधार शिविरों में आराम कर रहे हैं। चतुर्दर्शी का जलाभिषेक आज रात से आरंभ होगा और चतुर्दर्शी काल में भगवान दूधेश्वर का विशेष पूजन किया जाएगा। आठ पहर में अलग-अलग खाद्य पदार्थों से भगवान को स्नान करा रूद्राभिषेक होगा और जलाभिषेक किया जाएगा। दूधेश्वरनाथ वेद विद्यापीठ के आचार्य लक्ष्मीकांत पाठी ने बताया कि भगवान दूधेश्वर की चतुर्दर्शी में हर पहर अलग-अलग तरह से पूजन किया जाता है और हर पहर का पूजन विशेष माना जाता है। पहले पहर की पूजा में भगवान दूधेश्वर का दूध से स्नान कराया जाता है। इसके उपरांत भगवान का श्रंृगाार किया जाता है और रद्राभिषेक के बाद जलाभिषेक किया जाता है। दूसरे पहर की पूजा में दही से शिवलिंग को स्नान कराया जाता है। वेद मंत्रोच्चार के साथ ही दही से स्नान के बाद विशेष फूलों से भगवानों का श्रंृगार कर रद्राभिषेक होता है। तीसरे पहर में गाय के दूध से बने देशी घी से फिर से भगवान का स्नान कर रूद्राभिषेक से किया जाता है। चौथे पहर में भगवान को शहद, पांचवे पहर में बूरा, छठे पहर में भस्म, सातवें पहर में गन्ने का रस और आठवें पहर में पंचामृत से भगवान दूधेश्वर का स्नान कर जलाभिषेक किया जाता है। आचार्य लक्ष्मीकांत पाठी ने बताया कि हर पहर की पूजा में करीब दो घंटे का समय लगता है। ऐसे में एक ओर शिवलिंग पर लगातार जलाभिषेक शिवभक्तों द्वारा किया जाता है वहीं, दूसरी तरफ प्रतीकात्मक शिवलिंग का आठों पहर का पूजन किया जाता है।