रोहित शर्मा
गाजियाबाद। पुरानी कहावत है कि लोहा ही लोहे को काटता है। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को भी उत्तर प्रदेश में भाजपा की काट उसकी तर्ज पर ही निकालनी होगी। इस काट को अमली जामा पहनाने के लिए पार्टी हाईकमान ने उत्तर प्रदेश में कवायद भी शुरू कर दी है। प्रबल संभावनाएं हैं कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजऱ यूपी में प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पद के लिए कल्कि पीठाधीश्वर और प्रियंका गांधी के सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णम् के नाम पर मुहर लगाई जा सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों की राय में आचार्य प्रमोद कृष्णम् भाजपा के हिंदुत्व के ध्रुवीकरण को रोकने और ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी में फिर से वापस लाने में बेहद सफल साबित होंगे।
गौरतलब है कि कोरोना के दौर में लगातार आलोचना का दंश झेल रही भाजपा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश को किसी भी कीमत पर अपने हाथ से निकलने नहीें देना चाहती है। खासकर, पश्चिम बंगाल में हार के बाद पार्टी ने उत्तर प्रदेश की जीत के लिए अभी से मंथन भी शुरू कर दिया है। पार्टी में बैठकों का दौर भी जारी हो गया है। उधर, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस भी प्रियंका गांधी के नेतृत्व में लगातार सक्रिय है। उत्तर प्रदेश में इस बार होने वाला विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए भी खास हंै। चुनाव में इस बार सीधे तौर पर पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव एवं यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी की साख दांव पर लगी है। गांधी परिवार अपनी साख बचाना चाहता है तो उत्तर प्रदेश में बेहतरीन प्रदर्शन के अलावा पार्टी के सामने कोई विकल्प नहीं बचा है। अब बड़ा सवाल है कि जो पिछले तीस साल में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस नहीं कर पाई वो अब कैसे होगा? इसके लिए पार्टी हाईकमान अपने विश्वासपात्रों से लगातार फीडबैक ले रहा है। अभी तक जो निकलकर सामने आया है, उसके अनुसार भाजपा को उसी की तर्ज पर कांग्रेस यूपी में पटखनी दे सकती है। सूत्रों के अनुसार पार्टी हाईकमान को सलाह दी गई है कि इसके लिए सबसे पहले उत्तर प्रदेश में अध्यक्ष बदलना होगा।
दरअसल, जिला पंचायत चुनाव के परिणाम आने के बाद यह साफ हो चला है कि कांग्रेस के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष बेशक मेहनती, ईमानदार और पार्टी के प्रति समर्पित हैं लेकिन समूचे प्रदेश में वे सर्वमान्य नहीं हैं। पार्टी के कई कद्दावर नेता संगठन पर उनकी पकड़ भी कमजोर मानते हैं। कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो पार्टी हाईकमान को ऐसी रिपोर्ट भी सौंपी गई है जिसमें कहा गया है कि यदि प्रदेश में अजय कुमार लल्लू के नेतृत्व में चुनाव होता है तो कांग्रेस को भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। कांग्रेस का ऐसा ही प्रदर्शन रह सकता है जैसा सन् 2017 के विधानसभा चुनाव में रहा था। पार्टी के सूत्रों की मानें तो सर्वमत से एक बार फिर यह बात सामने आई है कि प्रदेश की कमान एक बार फिर किसी ब्राह्मण के हाथों में सौंपी जानी चाहिए।
कांग्रेस में ब्राह्मण नेतृत्व की बात आती है तो कई नाम प्रासंगिक हो जाते हैं। इनमें जतिन प्रसाद, प्रमोद तिवारी और आचार्य प्रमोद कृष्णम् के नाम प्रमुख हैं। बात यदि प्रमोद कृष्णम् की करी जाए तो वे साधु हैं और कांग्रेस का चेहरा बनकर खड़े दिखाई देते हैं। कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार पर हुए हमलों को उन्हें बखूबी झेलते हुए देखा गया है। गांधी परिवार का भी आचार्य प्रमोद कृष्णम् पर पूर्ण विश्वास है। पार्टी के टिकट पर वे दो बार लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों में हुए विधानसभा चुनाव में वे पार्टी की ओर से स्टार प्रचारक भी रहे थे। सबसे बड़ी बात यह है कि कांग्रेस के ब्राह्मण नेताओं में से आचार्य प्रमोद कृष्णम ही ऐसे नेता हैं जो भाजपा के हिंदुत्व धु्रवीकरण की काट साबित हो सकते हैं। वे प्रदेश के 12 प्रतिशत ब्राह्मणों को भी सीधे तौर पर कांग्रेस के साथ जोडऩे में सफल हो सकते हैं।
यह भी साफ है कि जब ब्राह्मण पार्टी के साथ होंगे तो मुस्लिम मतदाता भी जुड़ेगा। वैसे भी आचार्य प्रमोद कृष्णम् मुस्लिम मतदाताओं पर भी खासी पकड़ रखते हैं। चुनाव के दौर में कांग्रेस पार्टी आचार्य प्रमोद कृष्णम के जरिए साधु समाज में भी सीधे तौर पर उनके जरिए सेंध लगा सकती है। ऐसे में आचार्य प्रमोद कृष्णम को पार्टी यूपी की कमान सौंपना बेहद सफल प्रयोग साबित हो सकता है।