प्रमुख अपराध संवाददाता
गाजियाबाद। कल एसएसपी मुनिराज ने एसएचओ नन्दग्राम मनेंद्र सिंह को अचानक लाइन हाजिर कर दिया। बिना किसी सुगबुगाहट के एसएचओ नन्दग्राम मनेंद्र सिंह के खिलाफ हुई इस कार्रवाई की चर्चा पुलिस महकमें चलती हुई दिखाई दे रही है। चर्चा में यूं तो लाइन हाजिर होने के कई कारण बताये जा रहे हैं, लेकिन पहला मुख्य कारण उनकी तैनाती के समय आईजी का अनुमोदन ना होना और दूसरा एडीजी की उनपर तिरछी नजर होना बताया जा रहा है।
बता दें कि युग करवट ने इस माह के शुरू में लिखी खबर में इस बात का उल्लेख कर दिया था कि कप्तान से लेकर आईजी व एडीजी के रडार पर आधा दर्जन से अधिक थानेदार व दो दर्जन से अधिक दरोगा/चौकी प्रभारी हैं। उस खबर में यह भी उल्लेख किया गया था कि देहात क्षेत्र के तीन थानों के अलावा शहर व टीएचए के दो थानों के एसएचओ के हमराह व चालक भी कप्तान के रडार पर आ चुके हैं। बता दें कि पिछले समय कौशांबी थाने के एसएचओ राघवेंद्र सिंह, उसके बाद मसूरी व मुरादनगर थानों की माइक के चालक व सहचालकों समेत एक दर्जन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कप्तान द्वारा लिया गया सख्त एक्शन और अब नन्दग्राम थाने के एसएचओ के खिलाफ हुई कार्रवाई ने हमारी खबर को पूरी तरह से सत्य साबित कर दिया। सूत्रों की माने तो अभी भी ऐसे चार थानेदार और एक दर्जन से अधिक दरोगा यानि चौकी प्रभारी है, जो कप्तान मुनिराज के रडार पर हैं। गौरतलब है कि वर्तमान में जहां दो थाने कोतवालविहीन हो गये हैं, वहीं भोजपुर थाने में तैनात सीओ रैंक के अधिकारी रितेश त्रिपाठी का कार्यकाल भी लगभग पूरा हो गया है। इसके चलते तीन थानों को नये इंचार्ज का इंतजार है। अब देखना यह है कि इन तीनों थानों को उनके नये कोतवाल कब तक मिल पाते हैं।