युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। जिला अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में डॉक्टर व स्टाफ से मारपीट के विरोध में आज सुबह स्वास्थ्य कर्मियों ने कामकाज ठप कर दिया। सुबह के समय ओपीडी सहित अन्य सेवाएं बंद होने से अस्पताल पहुंचे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लॉकडाउन के कारण पिछले डेढ़ महीने से अस्पताल की ओपीडी बंद चल रही थी जिसे पांच जून को ही खोला गया है, ऐसे में इलाज के लिए अस्पताल में मरीजों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ रही है। लेकिन मंगलवार को पहुंचे मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
बता दें कि बीती देर रात इमरजेंसी में कुछ लोग इलाज कराने के लिए पहुंचे। लेकिन इलाज कराने आए असामाजिक तत्वों ने किसी बात पर डॉक्टर और मौजूद स्टाफ से मारपीट करनी शुरू कर दी। इमरजेंसी में तोडफ़ोड़ के अलावा जान से मारने की धमकी भी दी।
 स्टाफ ने बताया कि जब मामले की जानकारी पुलिस को दी गई तो उल्टे यह कहकर टाल दिया गया कि यह स्टाफ का रोज़-रोज़ का तमाशा है। पुलिस के जवाब और घटना से नाराज़ स्वास्थ्य कर्मियों ने मंगलवार सुबह ओपीडी सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को ठप कर दिया। यहां तक कि जांच आदि का काम भी रोक दिया गया। मरीजों को दवाएं वितरित तक नहीं की गईं। यहां तक कि कर्मियों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई ना होने पर १२ बजे के बाद पूरी तरह से कामकाज ठप करने की चेतावनी दी। सभी स्वास्थ्य कर्मी एकत्र होकर सीएमएस डॉ.अनुराग भार्गव से मिलने पहुंचे।
सीएमएस के समझाने और मौके पर सीओ के पहुंचने के बाद ही स्वास्थ्य कर्मी शांत हुए। अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई कराने के संकेत दिए हैं तो वहंीं सीओ ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन स्वास्थ्यकर्मियों को दिया है। ज्ञापन देने के बाद स्वास्थ्यकर्मी काम पर वापस लौट गए। हालंाकि, दो घंटे तक कामकाज ठप रहने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए सुबह आठ बजे से ही भीड़ लगनी शुरू हो जाती है। लेकिन यहां भी मरीजों को दो घंटे तक इंतज़ार करना पड़ा। इस दौरान राजकीय नर्सेस संघ से अध्यक्ष हिना विक्टर, डिप्लोमा फार्मासिस्ट अध्यक्ष एसपी वर्मा, चतुर्थ रैणी कर्मचारी संघ अध्यक्ष तेज करन, मोहन लाल, पुष्पा, गीता, विमल, अंशु, राजेंद्र सिंह नागर, दुलारी, सईद, राजेश व कुंवर सिंह आदि सभी विभागों के स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।