युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम की लाइट विभाग मे हाल ही में हुए टेंडर के कथित खेल के बाद अब जलकल विभाग में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जलकल विभाग ने पहले पाइप लाइन से पानी की लीकेज रोकने के लिए टेंडर मांगे और इसके बाद कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए ठेकेदारों को मना कर दिया। अब ठेकेदार जलकल विभाग के अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। मगर उन्हें अब टेंडर नहीं दिया जा रहा है। जिस टेंडर को लेकर विवाद है उसे नगर निगम के जलकल विभाग द्वारा हाल ही में निकाला गया था इस टेंडर के जरिए जलकल विभाग की ओर से निविदाएं आमंत्रित की गई थी। निविदाओं का विषय पानी की पाइप लाइन में लीकेज रोकना था। नगर निगम द्वारा इसके लिए ई टेंडर मांगे गए थे। इसमें बढ़-चढ़कर ठेकेदारों ने हिस्सा लिया।
2 दिन पहले टेंडर ओपन भी हो गए। इसमें न्यूनतम और अधिकतम प्राइस के रेट आए हैं । जलकल विभाग से जुड़े ठेकेदार जब टेंडर के विषय में बात करने के लिए निगम पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि कोई टेंडर आवंटित नहीं किया जाएगा । निगम के अधिकारियों ने ठेकेदारों को यह भी बताया कि उन्होंने कोई काम छोडऩे के लिए नहीं बल्कि भविष्य में इस प्रकार के काम कराने के लिए टेंडर प्राइस ऑफर तय करने के लिए निकाले थे।
इससे उन ठेकेदारों के पैर तले की जमीन खिसक गई जो कई दिनों से नगर निगम की वेबसाइट पर टेंडर अपलोड करने तथा दस्तावेज जुटाने में कई कई हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। इसी को लेकर अब विवाद पैदा हो गया है। भाजपा पार्षद हिमांशु मित्तल का कहना है कि यह एक घोटाला और ठेकेदारों के साथ धोखाधड़ी है । इसकी जांच होनी चाहिए। उधर जलकल विभाग के जीएम योगेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है की हमने फैसला लिया है कि जो रेट टेंडर में आए हैं भविष्य में उन्हीं रेट के आधार पर नगर निगम पाइप लाइन लीकेज का काम कर आएगा। इस मामले में नगर निगम के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।