प्रभारी मंत्री के सामने उठे कई मुद्दे
हर चुनाव के बाद दूसरे चुनाव की तैयारी में भाजपा कार्यकर्ता लग जाता है। मानो ऐसा लगता है जैसे कोई पैड कार्यकर्ता हो। कार्यकर्ताओं का जुनून और उत्साह ही हमेशा पार्टी को आगे बढ़ाता है। अफसोस इस बात का है कि भाजपा में दूसरे दलों से आने वाले लोग पद भी पा लेते हैं और टिकट भी ले जाते हैं। सर्दी-गर्मी और बरसात में जय-जयकार करने वाले कार्यकर्ताओं को निराशा ही मिलती है। हर चुनाव बाद कार्यकर्ताओं को लोलीपोप दिया जाता है कि उन्हें अब कुछ मिलेगा लेकिन मिलता कुछ नहीं है। भाजपा का वनवास खत्म कराने में कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही है। लेकिन अब २०२४ में जब भाजपा को झटका लगा और बहुमत नहीं मिला तो फिर कार्यकर्ता याद आने लगे। क्योंकि इस बार कार्यकर्ताओं में पहले जैसा उत्साह नहीं था। अपने आप ही चार सौ पार का नारा हाईकमान लगा रहा था तो कार्यकर्ता भी घर ही बैठ गया कि जब चार सौ पार आ रहे हैं तो फिर मेहनत की क्या जरूरत है। लेकिन परिणाम ने सबको हिला दिया। अब कल जब प्रभारी मंत्री समीक्षा बैठक करने आये तो सबसे पहले कार्यकर्ताओं की बात निकली। हालांकि समीक्षा बैठकें बस एक दिखावा होती है लेकिन हो सकता है कि इस बार कार्यकर्ताओं के अच्छे दिन आ जाये। कल बैठक में सरदार एसपी सिंह ने कार्यकर्ताओं का मामला उठाया। उनका कहना था कि काफी समय से कार्यकर्ताओं से कहा जा रहा है कि उनका मनोनयन होगा लेकिन आज तक कोई मनोनयन नहीं हुआ इसलिए कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है। इसलिए जरूरत है कि कार्यकर्ताओं के मनोबल बढ़ाने की। समीक्षा बैठक में प्रभारी मंत्री असीम अरुण ने इस बात को गंभीरता से सुना और उन्होंने कहा कि एक महीने के अंदर आपको रिजल्ट मिलेगा। उन्होंने ये भी कहा कि कार्यकर्ताओं की कैटेगिरी बनाई जा रही है और उसके हिसाब से ही उनका मनोनयन होगा। उन्होंने साफ कहा कि ऐसा नहीं होगा कि कोई नया पार्टी में आया और उसका मनोनयन कर दिया गया। इसीलिए कार्यकर्ताओं की कैटेगिरी के हिसाब से उनको कुछ ना कुछ पार्टी अब देगी। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं के अच्छे दिन आने वाले हैं। यदि इस बार भी लोलीपोप ही दिया गया तो फिर २०२७ में होने वाले विधानसभा चुनाव का परिणाम क्या रहेगा इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जय हिंद